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छत्तीसगढ़राज्य

‘मोर गांव, मोर पानी महाअभियान‘ के तहत जल संरक्षण हेतु प्रशिक्षण कार्यकम आयोजित

Last updated: 2025/06/18 at 9:56 AM
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4 Min Read
‘मोर गांव, मोर पानी महाअभियान‘ के तहत जल संरक्षण हेतु प्रशिक्षण कार्यकम आयोजित
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उत्तर बस्तर कांकेर 
छत्तीसगढ़ शासन के
निर्देशानुसार कांकेर जिले  में ’मोर गांव, मोर पानी’ महाअभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। उक्त संबंध में कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर द्वारा बताया गया कि जिले में औसतन 1200-1300 मिमी वार्षिक वर्षा होती है, फिर भी जिले में जल संकट की स्थिति बनी रहती हे। इसके पीछे अनियमित मानसून, पहाड़ी क्षेत्रों में तीव्र सतही जल बहाव और घटती भूजल पुनर्भरण जैसे कारण है। यह संकट अति गंभीर है, जहां अत्यधिक जल बहाव, मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता का कम होना और क्षतिग्रस्त जलग्रहण क्षेत्र, अनियमित मानसून कृषि को अलाभकारी बना देती है।

उन्होंने बताया कि इस वर्षा ऋतु जल संरक्षण का अभियान को जन आंदोलन का रूप देने का लक्ष्य है, इसके लिए जिले की सभी 454 ग्राम पंचायतों में 02 से 05 जून तक चार दिवसीय उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोज़ित किया गया। कार्यक्रम में जिले के सभी 454 ग्राम पंचायतों के सरपंचों, सचिवों, रोजगार सहायकों, बिहान समूह के सदस्यों और जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न विभागों द्वारा जल संरक्षण और जल संचयन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी द्वारा बताया गया कि मोर गांव, मोर पानी की मुख्य विशेषता यह है कि यह सामुदायिक नेतृत्व वाली योजना है। इस अभियान में योजनाओं का निर्माण और कार्यान्वयन स्थानीय समुदाय के नेतृत्व में होता है। इसी प्रकार वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टिकोण के तहत जल प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकां का उपयोग किया जाता है। युक्तधारा पोर्टल का उपयोग करके डेटा इकट्ठा किया जाता है, जो बेहतर योजना और निगरानी में मदद करता है। वाटरवेल पोर्टल का उपयोग जल स्रोतों की निगरानी या प्रबंधन के लिए किया जाता है।

उन्होंने आगे यह भी बताया कि भौगोलिक सूचना प्रणाली के ओपन सोर्स टूल्स का उपयोग मानचित्रण और स्थानिक विश्लेषण में सहायक होता है। साथ ही योजनाओं का अभिसरण विभिन्न सरकारी योजनाओं को एक साथ लाकर एकीकृत परिणाम प्राप्त करने पर जोर दिया जाता है। क्षमता निर्माण और संस्थागत सशक्तीकरण व्यक्तियों की क्षमताओं को बढ़ाने और स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करने का लक्ष्य है। जल संरक्षण के प्रयासों को सीधे लोगों की आजीविका सुधारने से जोड़ा गया है। इसके लिए निरंतर निगरानी लागू की गई पहल की लगातार निगरानी और मूल्यांकन किया जाता है। मोर गांव मोर पानी अभियान एक समग्र, समुदाय केंद्रित और तकनीकी रूप से उन्नत दृष्टिकोण अपनाकर जल संरक्षण और प्रबंधन को सुनिश्चित कर रहा है। इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जिले में लगातार विकास हो रहा है, जिला प्रशासन के प्रयास से जिले को जल संकट से जल्द ही निदान मिल जाएगा।

अपेक्षित परिणाम –
बेहतर जल सुरक्षा और मृदा प्रबंधन के तहत जल संचयन और भूमि उपचार के माध्यम से कृषि उत्पादकता और जल उपलब्धता बढ़ेगी। इसी प्रकार स्थायी परिसंपत्ति निर्माण से टिकाउ जल संरचनाओं और प्राकृतिक संसाधन प्रणालियों का निर्माण होगा। आजीविका संवर्धन से बेहतर जल उपलब्धता और आजीविका परिसंपत्तियों से ग्रामीण रोजगार और आय में वृद्धि होगी। साथ ही स्थानीय और स्वामित्व का सुदृढ़ीकरण से पंचायती राज संस्थाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों की क्षमता में वृद्धि होगी, इससे स्थानीय विकास कार्यों में उनकी भागीदारी और नेतृत्व मजबूत होगा और वे अपने गांव के लिए बेहतर निर्णय ले सकेंगे।

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