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मध्यप्रदेशराज्य

ग्वालियर व्यापार मेला 25 दिसंबर से शुरू, रोड टैक्स छूट को लेकर कमिश्नर ने लिखा पत्र

Last updated: 2025/10/16 at 6:06 PM
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6 Min Read
ग्वालियर व्यापार मेला 25 दिसंबर से शुरू, रोड टैक्स छूट को लेकर कमिश्नर ने लिखा पत्र
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ग्वालियर
ग्वालियर व्यापार मेला इस वर्ष भी 25 दिसम्बर से 25 फरवरी तक आयोजित होगा। पिछले वर्ष मेला में दुकान लगाने वाले ऐसे दुकानदार, जिन्होंने अब तक बकाया राशि जमा नहीं की है, ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण ने ऐसे सभी दुकानदारों से शीघ्र ही बकाया राशि जमा कर ‘नो-ड्यूज’ प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए कहा है। बकायादारों की सूची मेला प्राधिकरण के नोटिस बोर्ड पर उपलब्ध है।

मेला प्राधिकरण के सचिव ने बताया कि इस वर्ष दुकान आवंटन के लिए विगत वर्ष का आवंटन आदेश, ‘नो-ड्यूज’ प्रमाण-पत्र, स्वयं का फोटो, पैन कार्ड एवं निवास प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि दुकानदार ऑनलाइन आवेदन से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें, ताकि आवेदन के समय किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मेला की जान ऑटो मोबाइल सेक्टर रहता है। यह मेला पिछले 120 साल से अंचल की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उन्नति की पहचान बन चुका है।

यहां वाहन खरीद पर मिलने वाली रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट इसे और खास बना देती है। बुधवार को संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने मेला में वाहन खरीद पर मिलने वाली रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट के लिए शासन को पत्र लिखा है।

जिससे मेला शुरू होने के साथ ही मेला से वाहन खरीद करने वालों को फायदा मिल सके। मेला में ऑटो मोबाइल सेक्टर के लिए 38 दुकानों के ऑनलाइन आवेदन भी आ चुके हैं।
ग्वालियर मेला की तैयारियां अब शुरू हो गई हैं।

मेले का इंतजार ग्वालियरवासी बेसब्री से करते हैं। इस वर्ष भी मेला अपनी गरिमा और भव्यता के साथ आयोजित हो। इसके लिए संभागीय आयुक्त मनोज खत्री द्वारा मेले की व्यवस्थाओं के संबंध में निरंतर समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।

ग्वालियर व्यापार मेले में देश भर के व्यापारी अपनी भागीदारी कर सकें, इसके लिए मेले की दुकानों का आवंटन भी इस वर्ष ऑनलाइन प्रारंभ किया गया है।मेले के ऑटोमोबाइल सेक्टर में ऑनलाइन दुकानों के आवंटन का कार्य, शिल्प बाजार में दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

मेला सचिव सुनील त्रिपाठी ने बताया कि ग्वालियर व्यापार मेले में 32 बकायदार दुकानदारों द्वारा 4 लाख 79 हजार 660 रुपए जमा कर एनओसी प्राप्त कर ली गई है।साथ ही ऑटोमोबाइल सेक्टर में दुकान आवंटन के लिए एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर 18 दुकानदारों द्वारा पंजीयन कर 38 दुकानों के आवंटन के लिए आवेदन प्रस्तुत किए हैं।

मेले की व्यवस्थाओं के साथ-साथ मेला परिसर की साफ-सफाई रंगाई-पुताई का कार्य भी तेजी के साथ किया जा रहा है।रियासतकाल से आधुनिक युग तक की गौरव यात्रा वर्ष 1905 में ग्वालियर रियासत के तत्कालीन शासक महाराज माधौराव सिंधिया (प्रथम) ने इस मेले की नींव 'मेला मवेशियान' के रूप में रखी थी।

पशुधन की नस्ल सुधारने, किसानों और पशुपालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा ग्वालियर अंचल के उत्पादों को देश के अन्य भागों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह मेला शुरू किया था।उस समय यह ग्वालियर मेला सागरताल के 50 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में आयोजित होता था, जहां पानी की सुविधा और ग्रामीण संपर्क इसकी बड़ी ताकत थी। बढ़ती लोकप्रियता के साथ, यह मेला व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया।

इसके परिणामस्वरूप वर्ष 1918 में इसे वर्तमान रेसकोर्स रोड स्थित 104 एकड़ भूमि पर स्थायी रूप से स्थापित किया गया और इसे नया नाम मिला व्यापार मेला एवं कृषि प्रदर्शनी”।

आरंभ में मेला अवधि 20 दिसंबर से 14 जनवरी तक तय की गई। एक ऐसा समय जब ग्वालियर की सर्द हवा व्यापारिक उत्साह से सराबोर हो उठती है। व्यवसाय और संस्कृति का संगम समय के साथ-साथ ग्वालियर मेला केवल व्यापारिक आयोजन तक नहीं रहा, बल्कि यह संस्कृति, मनोरंजन और जनसंवाद का महाकुंभ बन गया। ग्रामीण कलाकारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों का मंच यह मेला बना है। यह आयोजन हर वर्ग को जोड़ता है।

वर्ष 1934 में काउंसिल ऑफ रीजेंसी ने इसके प्रबंधन के लिए “मेला व नुमायश ग्वालियर” की रूपरेखा बनाई, जिसे बाद में 'ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल, एग्रीकल्चरल एंड आर्ट्स एग्जीबिशन' के नाम से प्रसिद्धि मिली।राज्य स्तरीय गौरव और ऐतिहासिक पड़ाव ग्वालियर मेला को 23 अगस्त 1984 को राज्य स्तरीय ट्रेड फेयर का दर्जा प्राप्त हुआ। इसके बाद इसकी पहचान और प्रभाव दोनों कई गुना बढ़ गए।

वर्ष 1967-68 में मेले की हीरक जयंती मनाई गई। इसी तरह वर्ष 1982-83 में प्लेटिनम जयंती एवं वर्ष 2004-05 मेले ने अपनी शताब्दी वर्षगांठ मनाई।

शासन द्वारा वर्ष 2002 में मेले का नाम 'श्रीमंत माधवराव सिंधिया व्यापार मेला” घोषित किया गया। इसके बाद 30 दिसंबर 1996 को लागू ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण अधिनियम के तहत इसका प्रबंधन स्वतंत्र प्राधिकरण को सौंपा गया, जिससे मेले के संचालन और विकास को संस्थागत स्वरूप मिला।

ग्वालियर मेला: परंपरा से तकनीक तक आज ग्वालियर मेला केवल परंपरा का प्रतीक नहीं, बल्कि नवाचार, आत्मनिर्भरता और डिजिटल युग की पहचान भी है। ऑनलाइन आवंटन प्रणाली, थीम आधारित पवेलियन और प्रदेशभर के उद्योगों की सहभागिता इसे आधुनिकता से जोड़ते हैं। साथ ही लोककला, हस्तशिल्प, झूले, और सांस्कृतिक कार्यक्रम इसकी जीवंतता को बनाए रखते हैं।

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